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उत्तराखंड में स्मार्ट विद्युत मीटर बना आरोपों का केंद्र, सरकार इन इलाकों में नहीं लगाएगी स्मार्ट विद्युत मीटर
उत्तराखंड में अब स्मार्ट विद्युत मीटर के मामले ने तूल पकड़ लिया है, लिहाजा उत्तराखंड विधानसभा बजट सत्र के दौरान भी विधानसभा में विपक्ष द्वारा विरोध प्रदर्शन देखने को मिला। इसी क्रम में नेता प्रतिपक्ष यशपाल आर्य ने कहा कि प्रदेशभर में आरोप लग रहे हैं कि सरकार जबरन आमजन पर यह मीटर थोप रही है जिसपर प्रदेश सरकार ने पलटवार करते हुए कहा कि इससे बिजली चोरी रुकेगी और बिलिंग की समस्या समाप्त होगी।
13 महीनों का भुगतान
प्रदेश सरकार की इस योजना पर विधायक तिलकराज बेहड़ ने कहा कि सरकार ने गढ़वाल व कुमाऊं में अलग-अलग कंपनियों को 2027 करोड़ की लागत से इन मीटर को लगाने का ठेका दिया है, तिलकराज बेहड़ ने बताया कि गढ़वाल में यह ठेका जिस कंपनी को दिया गया है उसका नाम जेनेसिस है और उस पर ED का छापा भी पड़ चुका है जिस कारण उसके दो अधिकारी जेल में हैं। उप नेता प्रतिपक्ष भुवन कापड़ी ने कहा कि इस मीटर का बिल 28 दिन में आएगा, यानी आमजन को 12 माह के स्थान पर 13 माह का बिल भुगतान करना होगा।सरकार इन इलाकों में नहीं लगाएगी स्मार्ट विद्युत मीटर
उत्तराखंड में प्रदेश सरकार ने स्मार्ट विद्युत मीटर की योजना पर बयान देते हुए कहा कि प्रदेश में स्मार्ट मीटर पर्वतीय क्षेत्रों व ऐसे ग्रामीण क्षेत्रों में अभी नहीं लगाए जाएंगे, जहां इंटरनेट कनेक्शन नहीं हैं। वहीं प्रदेश के संसदीय कार्य मंत्री प्रेमचंद अग्रवाल ने सदम में विपक्ष के सम्मुख स्पष्ट किया कि देशव्यापी योजना के तहत स्मार्ट मीटर लगाने का कार्य किया जा रहा है और इससे रियल टाइम में बिजली की खपत का पता चल सकेगा। जो व्यक्ति बिजली का जितना इस्तेमाल करेगा, उसे उतना ही बिल भरना पड़ेगा। उन्होंने कहा कि यह मीटर प्रीपेड नहीं, बल्कि पोस्ट पेड मोड पर ही लगाए जा रहे हैं। विपक्ष के बयानों पर प्रतिक्रिया देते हुए राज्य संसदीय कार्य मंत्री प्रेम चंद अग्रवाल ने स्पष्ट किया कि मीटर लगाने से चोरी रुकेगी। इसकी आनलाइन रीडिंग आने से बिलिंग की समस्या समाप्त होगी और साथ ही कंपनी चयन का कार्य पूरी पारदर्शिता से किया गया है। सरकार जो भी कार्य कर रही है उस पर सोच विचार करने के बाद ही काम कर रही है।लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)




