Lata Mangeshkar birth Anniversary: लता दीदी के 5 गाने जो कर देंगे आपकी आँखे नम
Lata Mangeshkar birth Anniversary: लता मंगेशकर के अमर गीत, जैसे 'ऐ मेरे वतन के लोगों' और 'लग जा गले', आज भी सुनने वालों को भावुक कर देते हैं। उनके जन्मदिन पर इन टॉप 5 गीतों के साथ उनकी मधुर आवाज और विरासत को याद करें।
Lata Mangeshkar birth Anniversary(फोटो साभार- Wikipedia common)
Lata Mangeshkar birth Anniversary: लता मंगेशकर भले ही आज हमारे बीच नहीं हैं, लेकिन उनके गाने आज भी लोगों को उनकी याद दिलाते हैं। अपने लंबे करियर में उन्होंने 36 भाषाओं में 50,000 से अधिक गीत गाए। उन्हें भारत रत्न, पद्मभूषण, पद्मविभूषण और दादा साहब फाल्के अवॉर्ड जैसे अनेक सम्मान प्राप्त हुए। विश्व स्तर पर भी उन्होंने अपनी खास पहचान बनाई और उन्हें “नाइटिंगेल ऑफ इंडिया” तथा “क्वीन ऑफ मेलोडी” जैसे खिताब दिए गए। उनकी जितनी तारीफ़ की जाए उतनी कम है।
लता दीदी का जन्म 28 सितंबर 1929 को हुआ था और 6 फरवरी 2022 को उनका निधन हो गया। अब जल्द ही उनका जन्मदिन आने वाला है। इस अवसर पर आइए जानते हैं उनके टॉप 5 गीतों के बारे में, जिन्हें सुनकर आपकी आँखें नम हो सकती हैं।
1. ऐ मेरे वतन के लोगों
यह एक अमर देशभक्ति गीत है, जिसे कवि प्रदीप ने लिखा और लता मंगेशकर ने अपनी मधुर आवाज में गाया। 1962 के भारत-चीन युद्ध में शहीद सैनिकों को श्रद्धांजलि देने के लिए रचा गया यह गीत इतना भावुक है कि इसे सुनकर तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू की आँखें भी नम हो गई थीं। यह गीत आज भी देशभक्ति की भावना को जागृत करता है।
2. तेरे बिना जिंदगी से कोई शिकवा तो नहीं
फिल्म आंधी (1975) का यह गीत लता मंगेशकर और किशोर कुमार की युगल आवाज में है। गुलज़ार के बोल और आर.डी. बर्मन के संगीत ने इस गीत को हिंदी सिनेमा के सबसे भावुक गीतों में से एक बना दिया। यह गीत प्रेम और अधूरेपन की भावना को गहराई से दर्शाता है, खासकर पंक्तियाँ: “तेरे बिना ज़िंदगी से कोई शिकवा तो नहीं… तेरे बिना ज़िंदगी भी लेकिन ज़िंदगी तो नहीं।”
3. लग जा गले
1964 की फिल्म वो कौन थी? का यह क्लासिक गीत लता मंगेशकर की आवाज में अमर है। मदन मोहन के संगीत और राजा मेहंदी अली खान के बोलों से सजा यह गीत प्रेम और बिछड़ने की भावना को व्यक्त करता है। “लग जा गले कि फिर ये हसीं रात हो न हो…” जैसी पंक्तियाँ सुनकर श्रोता भावुक हो उठते हैं।
4. रुला के गया सपना मेरा
फिल्म ज्वेल थीफ (1967) का यह गीत लता मंगेशकर की दिल छू लेने वाली आवाज में है। शैलेंद्र के बोल और एस.डी. बर्मन के संगीत से सजा यह गीत टूटे सपनों और अकेलेपन की भावना को बयां करता है। यह गीत आज भी सुनने वालों को भावनाओं के गहरे समुद्र में ले जाता है।
5. कुछ दिल ने कहा, कुछ भी नहीं
1966 की फिल्म अनुपमा का यह गीत लता मंगेशकर की सौम्य और भावपूर्ण आवाज का बेहतरीन नमूना है। कैफी आज़मी के बोल और हेमंत कुमार के संगीत से सजा यह गीत प्रेम और खामोशी की भावनाओं को व्यक्त करता है। यह गीत अपनी सादगी और गहराई के लिए आज भी याद किया जाता है।
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