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3 साल से सूखा पड़ा यह जलस्त्रोत, स्थानीय लोग हैं परेशान…बुझ रहे प्राकृतिक जल स्त्रोत, प्रशासन है मौन

उत्तराखंड के कुमाऊं राजमार्ग पर स्थिक इस जल स्त्रोत से ही भीमताल झील को रीचार्ज करने का सहारा लिया जाता था, मगर बीते 3 सालों से यह जल स्त्रोत भी सूख चुका है, लिहाजा स्थानीय परेशान हैं और मुख्यमंत्री से जल स्रोत को पुनर्जीवित करने की मांग करने पर भी कोई बात बनती नजर नहीं आई।

उत्तराखंड वैसे तो एक पर्वतीय राज्य है लेकिन राज्य के कई जिलों में ऐसी सुंदरता बसती है जिसको शब्दों में बयां करना आसान नहीं है। इसके साथ-साथ उत्तराखंड झीलों वाला राज्य भी है लेकिन वर्तमान समय में प्रदेश में जल स्त्रोतों की स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं है, ऐसी ही एक घटना नैनीताल से सामने आई है जहां जल स्त्रोत सूखते जा रहे हैं। दरअसल कुमाऊं राजमार्ग पर एक जल स्त्रोत पड़ता है जो सदियों से लहलहा कर बहता था लेकिन अब आलम यह है कि बीते तीन बरस से वह भी पूरी तरह से सूख चुका है। चूंकी यह जल स्त्रोत 15 से 20 लीटर प्रति मिनट की दर से बहता था लिहाजा यह जल स्त्रोत प्रसिद्ध भीमताल झील को रिजार्ज करने वाला एक महत्वपूर्ण स्त्रोत है। वहीं भीमताल जो झीलों का शहर कहा जाता है उसके एक प्रमुख जल स्त्रोत के सूखने पर शासन-प्रशासन की ओर से कोई भी प्रतिक्रिया नहीं दी गई, एक ओर तो झीलों के नगर भीमताल में शासन-प्रशासन जल सरंक्षण जैसे गंभीर मुद्दों पर बड़े-बड़े दावे और सेमिनार आयोजित करता है लेकिन बीते 3 साल से सूखे इस जल स्त्रोत की सुध लेना और उसका संरक्षण करना शासन-प्रशासन जरूरी नहीं समझता। इसे लेकर समाजसेवी बृजवासी ने मुख्य विकास अधिकारी अशोक पांडेय से स्रोत के सूखने के कारणों की जांच एवं सूखे जल स्रोत को पुनर्जीवित करने की माँग की है।    

बुझ रहे प्राकृतिक जल स्त्रोत, प्रशासन है मौन

    बुझते जल स्त्रोत को लेकर स्थानीय निवासियों ने दो वर्ष पूर्व मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी के घोड़ाखाल मंदिर दौरे के दौरान उनसे सीधे तौर पर मांग की थी लेकिन तब से लेकर अब तक जल स्त्रोत के सूखने के कारणों की जांच करने पर जल संस्थान, सिंचाई विभाग, वन विभाग, प्राधिकरण विभाग, नगर पंचायत और जिला प्रशासन के अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। वहीं स्थानियों का कहना है कि मुख्यमंत्री कार्यालय ने 11 मई 2022 को पत्रांक संख्या 4511 के माध्यम से प्रशासन को जांच के निर्देश भी दिए थे लेकिन इसके बाद भी स्त्रोत के सूखने की जांच को लेकर कोई प्रगति होती नजर नहीं आई। जल संरक्षण से संबंधित इस गंभीर समस्या को ध्यान में रखते हुए सामाजिक कार्यकर्ता पूरन चंद्र बृजवासी ने कई बार निम्न स्तर से लेकर मुख्यमंत्री तक अपनी मांगें उठाई हैं, लेकिन शासन-प्रशासन इस मामले में कोई ठोस कदम उठाने में असफल रहा है। वहीं स्थानीय निवासियों का कहना है कि उन्होंने अपने जीवन में पहली बार इस जल स्रोत को सूखते देखा है लिहाजा इस जल स्रोत के सूखने के कारण आसपास के क्षेत्र में पानी की गंभीर कमी उत्पन्न हो गई है। गर्मी का मौसम आने वाला है और नगरवासी सभी चिंतित हैं उनका कहना है कि यदि नगर की जल धाराएं इसी तरह सूखती रहीं और प्रशासन जांच करने में असफल रहा, तो जल संरक्षण पर उनके बड़े-बड़े दावे करने का कोई अर्थ नहीं रह जाएगा। वहीं ब्रजवासी ने आज पुनः मुख्य विकास अधिकारी नैनीताल, अशोक पांडेय से सूखे जल स्रोत की तात्कालिक जांच और उसे पुनर्जीवित करने की मांग की है।      
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

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