अवैध अतिक्रमणउत्तराखंड
रिस्पना फ्लड जोन की 525 अवैध बस्तियों पर लटकी ध्वस्तीकरण की तलवार.. राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने दिया आदेश
राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने मलिन बस्तियों के निस्तारण मामले में राज्य सरकार की मुश्किलें अब और भी अधिक बढ़ा दी हैं। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने 16 दिसंबर को रिस्पना के किनारे बसी अवैध बस्तियों को अमान्य घोषित करते हुए नदी किनारे बसी अवैध बस्तियों को ध्वस्त करनें के सख्त निर्देश भी जारी करे हैं। साथ ही प्रदेश सरकार को आदेश दिए हैं कि प्रदेश सरकार 13 फरवरी तक अतिक्रमित बस्तियों पर की गई कार्यवाही की एक रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सौंपे जिसमें प्रदेश सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के उपयोगी उपायों का भी उल्लेख करना होगा।
उत्तराखंड में हाल ही में अवैध बस्तियों पर MDDA और नगर निगम के स्तर पर कार्यवाही करी गयी थी जिसमें नगर निगम और MDDA ने रिस्पना नदी के किनारे 27 बस्तियों में कुल 525 मकानों को चिह्नित किया था जिनमें से कुछ मकानों को ध्वस्त भी किया गया था लेकिन इन सबके बावजूद भी राज्य सरकार पर राष्ट्रीय हरित अधिकरण (NGT) का प्रहार जारी है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने स्पष्ट रुप से कहा है कि फ्लड जोन में किसी भी प्रकार का स्थाई निर्माण ना तो किया जा सकता है और ना ही सुरक्षा की दृष्टि से वह उपयुक्त है। राष्ट्रीय हरित अधिकरण के पारित निर्देशों ने रिस्पना स्थित अवैध बस्तियों को प्रदेश सरकार के गली की हड्डी बनाकर रख दिया है। प्रदेश सरकार ने अवैध बस्तियों के ध्वस्तीकरण पर रोक लगाने के लिए जितने भी यत्न किए थे वे सभी बेजान साबित होते नजर आ रहे हैं। गत 16 दिसंबर को राष्ट्रीय हरित अधिकरण ने रिस्पना किनारे स्थित अवैध बस्तियों को अमान्य घोषित करते हुए कहा कि देहरादून में रिस्पना नदी के बाढ़ क्षेत्र में स्थित अवैध बस्तियों के घरों को नष्ट किया जाए और साथ ही प्रदेश सरकार को सख्त निर्देशों में संकेत किया है कि प्रदेश सरकार 13 फरवरी तक अतिक्रमित बस्तियों पर की गई कार्यवाही की एक रिपोर्ट राष्ट्रीय हरित अधिकरण को सौंपे जिसमें प्रदेश सरकार को प्रदूषण नियंत्रण के उपयोगी उपायों का भी उल्लेख करना होगा।
