उत्तराखंडजलवायु परिवर्तनबड़ी खबर

उत्तराखंड में जलवायु परिवर्तन का शिकार हो रहे ग्लेशियर….30 वर्षों में 4881 घन किलोमीटर घटी बर्फ

उत्तराखंड में ग्लेशियरों की स्थिति एक गंभीर विषय है, उत्तराखंड के ग्लेशियरों में व्याप्त बर्फ की मात्रा में 36.75 प्रतिशत की कमी को पाया गया है। इसका सीधा प्रभाव कृषि के लिए जल उपलब्धता में कमी, अचानक बाढ़ और भूस्खलन की घटनाओं में तीव्रता और सूखे की स्थिति जैसी घटनाओं पर दिखाई देने के प्रबल आसार हैं।

विश्व जल दिवस की इस साल की थीम है “ग्लेशियर सरंक्षण”, आपको बता दें कि यह विषय की चर्चा इसलिए भी अधिक महत्वपूर्ण है क्योंकि विश्व के ताजे पानी का तकरीबन 68.7 प्रतिशत भाग ग्लेशियरों में संरक्षित है और अगर वर्तमान समय में ग्लेशियरों की स्थिति और सेहत पर चर्चा करी जाए तो उनपर एक गंभीर खतरा मंडरा रहा है। जहां एक ओर तेजी से पिघल रहे ग्लेशियर आने वाले समय के लिए गंभीर जल संकट की ओर इशारा कर रहे हैं तो वहीं दूसरी ओर विश्व की बड़ी संख्या में आबादी भी इससे प्रभावित हो सकती है। आपको बता दें कि विश्व की तमाम विशेषज्ञ एजेंसी मानती हैं कि यह संकट सर्वाधिक दक्षिण एशिया पर मंडरा रहा है, चूंकी हिंदू कुश में हिमालय स्थित ग्लेशियरों की पिघलने की दर सबसे अधिक है लिहाजा इसके जल से लाभान्वित हो रहे भारत ही नहीं बल्कि दक्षिण एशिया की 200 करोड़ की आबादी गंभीर रूप से प्रभावित होने का अनुमान है।

उत्तराखंड जलवायु परिवर्तन का शिकार हो रहे ग्लेशियर

        ग्लेशियरों की बिगड़ती स्थिति को लेकर मिजोरम यूनिवर्सिटी के प्रो. विश्वंभर प्रसाद सती का कहना है कि उत्तराखंड या सेंट्रल हिमालय के ग्लेशियर जलवायु परिवर्तन के गंभीर खतरे से जूझ रहे हैं। जमी हुई बर्फ की मोटी चादर लगातार पतली होती चली जा रही हैं और उसकी जगह जल्द प्रभावित होने वाली पतली चादर में अप्रत्याशित वृद्धि देखने को मिल रही है। वहीं जलवायु परिवर्तन और गर्मी के बढ़ते प्रभाव से स्नो लाइन भी ऊपर की तरफ सरक रही है। प्रो. विश्वंभर प्रसाद सती बताते हैं कि उच्च हिमालय के क्षेत्रों में बढ़ते मानवीय दखल और निरंतर बढ़ते गर्म दिनों के कारण स्नो लाइन वर्ष 1991 से लेकर वर्ष 2021 के बीच 700 मीटर ऊपर सरक गया है, अर्थात पहले बर्फ का जो दायरा स्नो कवर के रुप में निचले क्षेत्रों में सालभर तक दिखाई देता था, वह भी अब धीरे-धीरे समाप्त होता जा रहा है। यह स्थिति एक चिंता का विषय है जो कि आने वाले समय में भारत में भविष्य के गंभीर जल संकट पैदा कर सकती है।

30 वर्षों में 4881 घन किलोमीटर घटी बर्फ

      निरंतर पिघल रही बर्फ को देखते हुए सभी विश्व की तमाम विशेषज्ञ एजेंसियां भी चिंतित हैं वहीं सीनियर प्रोफेसर विश्वंभर सती के मुताबिक साल 1991 में उत्तराखंड में बर्फ की मात्रा 13 हजार 281 घन किलोमीटर थी, जो कि अब साल 2021 में घटकर 8400 घन किलोमीटर रह गई है। इसका अर्थ साफ है कि पीछले 30 सालों में कुल 36.75 प्रतिशत बर्फ घट चुकी है जो कि काफी चिंता का विषय है। मिजोरम यूनिवर्सिटी के सीनियर प्रोफेसर विश्वंभर प्रसाद सती और रिसर्च स्कालर सुरजीत बनर्जी के अध्ययन के मुताबिक उत्तराखंड के ग्लेशियरों में बर्फ की स्थिति का आकलन वर्ष 1991 से 2021 के आंकड़ों के आधार पर किया गया। 30 वर्षों की अवधि में पाया गया कि बर्फ की मोटी परत (ग्लेशियर का मुख्य भाग) 10 हजार 768 घन किलोमीटर थी, जो अब घटकर महज 3258.6 घन किलोमीटर रह गई है। जिसका सीधा मतलब है कि ग्लोबल वार्मिंग के असर के कारण अधिक समय तक टिकी रहने वाली बर्फ की मोटी चादर निरंतर घट रही है।        
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

HNN 24x7 Desk

HNN24x7 भारत का सर्वश्रेष्ठ हिंदी न्‍यूज चैनल है HNN24x7 is a trusted Hindi news channel bringing you breaking news, live updates, and top stories from India and around the world. Known for fearless journalism and unbiased reporting, our motto 'जुनून सच दिखाने का' (junuun sach dikhaane kaa) drives every story we tell. From politics to sports, Bollywood to business, we deliver fast and factual news you can rely on. Watch our popular shows like 3 बजे की 3 बड़ी खबरें, Kab Badlegi Tasveer (KBT) and Debate, Question Hour. Stay informed, stay empowered only with HNN24x7. Stay tuned for all the breaking news in Hindi ! Subscribe now for daily updates. #hnn24x7 #hindinews #breakingnews #uttarakhandnews #hindinews #HNN24x7News

Related Articles

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

Back to top button