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Raghopur Election Result 2025 : राहुल गांधी, मुकेश सहनी और आंतरिक कलह से कैसे घिर गए तेजस्वी यादव?

Raghopur Election Result 2025 : तेजस्वी ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनका संघर्ष इतना मुश्किल हो जाएगा। आइए, समझते हैं कि क्या-क्या गलत हुआ।

Raghopur Election Result 2025 : बिहार विधानसभा चुनाव 2025 में Raghopur Seat पर तेजस्वी यादव की हार ने सबको चौंका दिया। ये सीट लालू परिवार का गढ़ मानी जाती थी, लेकिन इस बार सब कुछ उलटा हो गया। तेजस्वी ने कभी सोचा भी नहीं होगा कि उनका संघर्ष इतना मुश्किल हो जाएगा। आइए, समझते हैं कि क्या-क्या गलत हुआ।  
Raghopur Election Result 2025
Raghopur Election Result 2025
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अमेठी जैसी हार, परिवार का गढ़ टूटा

  राघोपुर आरजेडी और लालू परिवार का मजबूत किला था, ठीक वैसे ही जैसे अमेठी कांग्रेस और गांधी परिवार का। राहुल गांधी 2019 में अमेठी हारे थे, उसी तरह तेजस्वी की हार हुई। तेजस्वी से पहले उनके माता-पिता लालू यादव और राबड़ी देवी राघोपुर के विधायक रह चुके हैं। सोनिया और राजीव गांधी की तरह। लेकिन इस बार परिवार का जादू नहीं चला। लालू की मौजूदगी में भी हार हुई, जो आरजेडी सबसे बड़ा झटका है।  

राहुल गांधी का रोल: गठबंधन में मनमानी

  आरजेडी और कांग्रेस साथ लड़ रहे थे, लेकिन राहुल गांधी का योगदान तेजस्वी के खिलाफ गया। वोटर अधिकार यात्रा में राहुल आगे-आगे, तेजस्वी पीछे-पीछे। तेजस्वी को सीएम चेहरा बनाने के लिए लालू ने अशोक गहलोत से कहलवाया। राहुल बिहार आए तो मनमानी की – कास्ट सेंसस को फर्जी कहा, जिसका क्रेडिट तेजस्वी ले रहे थे। मोदी पर निजी हमले किए, जो बिहार में फायदे की बजाय नुकसान देते रहे। राहुल जानते थे, नुकसान तेजस्वी का होगा।  
Raghopur Election Result 2025
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मुकेश सहनी की अहम भूमिका

  मुकेश सहनी भी तेजस्वी के लिए मुसीबत बने। उनकी पार्टी वीआईपी महागठबंधन में थी। सहनी डिप्टी सीएम बनना चाहते थे। 15 सीटें लेकर कड़ा मोलभाव किया। ओवर कॉन्फिडेंस में फ्रेंडली फाइट की, लेकिन उनकी पार्टी जीरो पर सिमट गई। 2020 में कांग्रेस ने 19 सीटें जीती थीं, लेकिन सहनी का खाता नहीं खुला। तेजस्वी सीएम बनते तो सहनी डिप्टी बनते, लेकिन सब सपना रह गया।  

प्रशांत किशोर का ‘नौवीं फेल’ कैंपेन

  तीन साल से प्रशांत किशोर जन सुराज अभियान चला रहे थे। तेजस्वी को ‘नौवीं फेल’ कहकर तंज कसा। नीतीश कुमार पर भी हमले किए, लेकिन तेजस्वी पर ज्यादा फोकस रहा। प्रशांत को खुद कुछ नहीं मिला, जेडीयू 25 सीटों पर सिमटने का दावा गलत साबित हुआ। लेकिन तेजस्वी का डैमेज हो गया। अब तेजस्वी को नई शुरुआत करनी पड़ेगी।  

तेज प्रताप का भारी पड़ना

  परिवार में तेज प्रताप यादव को हल्के में लिया गया। लालू ने विरासत तेजस्वी को दी, तेज प्रताप बांसुरी और भजन में लग गए। खुद को कृष्ण, तेजस्वी को अर्जुन कहते थे। तेज प्रताप ने कभी अपना नहीं मांगा, सिर्फ तेजस्वी को सीएम बनाने की बात की। लेकिन तेजस्वी ने कुल्हाड़ी पर पैर मार लिया। अपना चुनाव हारकर भी तेज प्रताप छोटे भाई पर भारी पड़े। राघोपुर की हार तेजस्वी जीवनभर नहीं भूलेंगे।  
Raghopur Election Result 2025
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नई शुरुआत की जरूरत

  तेजस्वी की हार में राहुल, सहनी, प्रशांत और परिवार का झगड़ा सब शामिल है। लालू की मौजूदगी में ये सब हुआ, जो काफी हैरान कर देने वाला है। अब तेजस्वी को बैकबाउंस करना होगा। बिहार की राजनीति में कुछ भी स्थायी नहीं। तेजस्वी युवा हैं, मेहनत से वापसी कर सकते हैं। लेकिन सबक लेना जरूरी गठबंधन, परिवार और दुश्मनों को संभालना सीखें।

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