त्यौहार
Rama Ekadashi के मौके पर संगमनगरी प्रयागराज में श्रद्धालुओं ने लगाई आस्था की डुबकी
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली Rama Ekadashi के पावन अवसर पर संगमनगरी प्रयागराज में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला।
कार्तिक मास के कृष्ण पक्ष में आने वाली Rama Ekadashi के पावन अवसर पर संगमनगरी प्रयागराज में श्रद्धा और भक्ति का अद्भुत संगम देखने को मिला। बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं ने पवित्र संगम तट पर पहुंचकर आस्था की डुबकी लगाई और भगवान विष्णु व मां लक्ष्मी की पूजा-अर्चना कर पुण्य अर्जित किया।
सुबह से ही प्रयागराज के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। स्नान के बाद भक्तों ने सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया। इस अर्घ्य में जल के साथ फूल, चावल और अन्य पवित्र सामग्री भी अर्पित की गई। पूजा के साथ व्रत रखने का विधान निभाते हुए भक्तों ने धन-धान्य, सुख-समृद्धि और शुभ फल की कामना की।
यह दिवाली से पहले और चातुर्मास की आखिरी एकादशी होती है। रमा एकादशी को कार्तिक शुक्ल एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह व्रत भगवान विष्णु की राक्षस मुरा पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है।
रमा एकादशी पर संगम तट से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसमें भक्तों की भीड़, पूजा-पाठ और धार्मिक वातावरण की झलक देखी जा सकती है।
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सुबह से ही प्रयागराज के घाटों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। स्नान के बाद भक्तों ने सूर्य देव को अर्घ्य अर्पित किया। इस अर्घ्य में जल के साथ फूल, चावल और अन्य पवित्र सामग्री भी अर्पित की गई। पूजा के साथ व्रत रखने का विधान निभाते हुए भक्तों ने धन-धान्य, सुख-समृद्धि और शुभ फल की कामना की।
यह दिवाली से पहले और चातुर्मास की आखिरी एकादशी होती है। रमा एकादशी को कार्तिक शुक्ल एकादशी भी कहा जाता है। मान्यता है कि यह व्रत भगवान विष्णु की राक्षस मुरा पर विजय की स्मृति में मनाया जाता है।
रमा एकादशी पर संगम तट से जुड़ी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर भी तेजी से वायरल हो रही हैं, जिसमें भक्तों की भीड़, पूजा-पाठ और धार्मिक वातावरण की झलक देखी जा सकती है।
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