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प्रदूषण बना निकाय चुनाव मेनिफेस्टो का बड़ा मुद्दा, भाजपा-कांग्रेस ने जताया हरित दून करनें का विश्वास
देहरादून उत्तराखंड की न सिर्फ राजधानी है बल्कि एक शहरी जिला भी है, लिहाजा देहरादून में आबादी और प्रदूषण का एक आपसी नाता है। भले ही केंद्र सरकार दून की आबोहवा को राष्ट्रीय स्वच्छ वायु प्रोग्राम के तहत स्वच्छ करने के अथक प्रयास कर रही हो लेकिन धरातलीय स्थिती यह है कि राजधानी की हवा में प्रदूषण अभी भी काफी मात्रा में विद्यमान है। लिहाजा प्रदेश में निकाय चुनावों में एक बड़ा मुद्दा प्रदूषण भी शामिल है।
भारत के महानगर इस वक्त एक ऐसी बीमारी से जूझ रहे हैं जिसका पूर्णत: उपचार करना सरकार के लिए भी एक चुनौती बना हुआ है, हांलांकि इस बीमारी के उपचार के लिए सरकार ने काफी महत्वपूर्ण कदम भी उठाए हैं, आपको बता दें यह बीमारी कुछ और नहीं बल्कि प्रदूषण है। प्रदूषण से जहां एक ओर देश के बड़े-बड़े महानगर ग्रसित हैं तो वहीं अधिकतर राज्यों के अधिक आबादी वाले जिले भी प्रदूषण की चपेट में आए हुए हैं। यही हाल उत्तराखंड की राजधानी देहरादून के भी हैं, जो आए दिन बढ़ रहे प्रदूषण में अपनी चमक को खोती जा रही है। देहरादून में वर्तमान समय पर 8 से 10 लाख लोग निवास करते हैं, स्वाभाविक है कि इतनी अधिक आबादी के आवागमन के लिए वाहनों की आवश्यक्ता भी पड़ेगी, लिहाजा यही वाहन देहरादून की आबोहवा में धीरे -धीरे जहर घोलते जा रहे हैं। उत्तराखंड में चुनावी बिगुल भी बज चुका है, जिसके चलते आगामी 23 जनवरी को प्रदेश में निकाय चुनावों को संपन्न कराना तय किया गया है। निकाय चुनावों में वैसे तो प्रत्येक राजनीतिक दल के अपने-अपने वादे किए गए हैं लेकिन प्रदेश में पक्ष-विपक्ष के दो बड़े दल- भाजपा व कांग्रेस ने अपने मेनिफेस्टो की झोली में एक बड़ा मुद्दा “प्रदूषण” को बनाया है, लिहाजा दोनों दलों ने दून जिले की जनता को विश्वास दिलाया है कि उनकी आगामी सरकार प्रदूषण के निपटान के लिए हर संभंव प्रयास करेगी।
