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उत्तराखंड में “मौसम का कोहराम”, राजधानी में टूटा 74 साल का रिकॉर्ड…..जानिए मौसम का पूर्वानुमान

उत्तराखंड पर्वतीय राज्य होने के कारण अमानवीय आपदाओं के लिहाज से अति संवेदनशील राज्य है, वहीं मानसून सत्र में प्रदेश के लिए दुश्वारियां बढ़कर चौगुनी हो जाती हैं। हालांकि, बीते वर्षों में उत्तराखंड में मानसून ने खासी तबाही मचाई तो जरुर है लेकिन इस वर्ष मानसून प्रदेश को हल्की चोट देकर छोड़ने के विचार में नहीं लग रहा है। बारिश ने राजधानी दून में बीते 74 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दून शहर के कई इलाकों में करीब 200 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो कि वर्ष 1951 में हुई 332 मिमी वर्षा के बाद सर्वाधिक है, लिहाजा इस प्रकार बारिश ने राजधानी में बीते 74 सालों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया।

उत्तराखंड में “मौसम का कोहराम”

  उत्तराखंड पर्वतीय राज्य होने के कारण अमानवीय आपदाओं के लिहाज से अति संवेदनशील राज्य है, वहीं मानसून सत्र में प्रदेश के लिए दुश्वारियां बढ़कर चौगुनी हो जाती हैं। हालांकि, बीते वर्षों में उत्तराखंड में मानसून ने खासी तबाही मचाई तो जरुर है लेकिन इस वर्ष मानसून प्रदेश को हल्की चोट देकर छोड़ने के विचार में नहीं लग रहा है। इस मानसून सत्र में उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों हुई तबाही और मैदानी इलाकों में हुए नुकसान की गणना करी जाए तो तुलनात्मक तौर पर यह बीते वर्षों की अपेक्षा महाभयंकर है। प्रदेश के नदी-नाले विकराल रुप से उफान पर हैं, वहीं पर्वतीय क्षेत्रों में सड़कें पूरी तरह ध्वस्त हो चुकी हैं और राज्य सरकार के समक्ष चुनौतियां मुंह फाड़े खड़ी हो चुकी हैं। उत्तराखंड में लगातार हो रही भारी बारिश से जन-जीवन संपूर्ण रुप से अस्त-व्यस्त हो चुका है। उत्तराखंड के पर्वतीय क्षेत्रों से लेकर मैदानी इलाकों तक मूसलाधार बारिश हो रही है और ये बारिशें जनजीवन प्रभावित कर रही हैं।  

राजधानी में टूटा 74 साल का रिकॉर्ड

  उत्तराखंड में लगातार हो रही बारिश से राजधानी देहरादून में भी लगातार समस्याएं बढ़ती नजर आ रही हैं, आपको बताते चलें कि बारिश ने राजधानी दून में बीते 74 सालों का रिकॉर्ड तोड़ दिया है। दून शहर के कई इलाकों में करीब 200 मिमी वर्षा दर्ज की गई, जो कि वर्ष 1951 में हुई 332 मिमी वर्षा के बाद सर्वाधिक है, लिहाजा इस प्रकार बारिश ने राजधानी में बीते 74 सालों के रिकॉर्ड को तोड़ दिया। हालांकि, यह रिकॉर्ड टुटना कोई हर्ष की बात नही बल्कि चिंता का विषय है। मौजूदा वक्त में राजधानी में स्थिति यह है कि रिस्पना जैसे कई छोटे नालों में उफान आ गया है, नालों के किनारे बसे बस्तियां ताश के पत्तों की तरह बिरखते नजर आ रहे हैं। वहीं दून शहर बरसाती नालों की वजह से सड़कों पर मलबा आ चुका है और अधिकतर मुख्य मार्ग बाधित हो चुके हैं। इसके अतिरिक्त हरिद्वार में भी 24 घंटे में हुई 242 मिमी वर्षा 74 साल में सर्वाधिक रही।  

जानिए मौसम का पूर्वानुमान

  राजधानी देहरादून स्थित मौसम विज्ञान केंद्र के निदेशक रोहित थपलियाल के अनुसार आज मंगलवार को हरिद्वार, सरोवर नगरी नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में भारी से भी अधिक भारी बारिश होने की संभावना है, लिहाजा इन तीनों जिलों में मौसम विज्ञान केंद्र द्वारा रेड अलर्ट जारी किया गया है। जबकि आने वाले तीन दिनों तक मौसम के तेवर इसी प्रकार तल्ख रहने की भी चेतावनी जारी करी गई है। इसके अलावा देहरादून समेत पांच अन्य जिलों में भारी वर्षा का आरेंज अलर्ट जारी किया है।      
लेखक- शुभम तिवारी (HNN24X7)

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